हज़ारों हैं रूप, हज़ारों हैं नाम,
समस्त देव लोक जिन्हें पूजते हैं आन,
हज़ारों हैं रूप, हज़ारों हैं नाम,
समस्त देव लोक जिन्हें पूजते हैं आन,
वो मृगछाला, वो भस्मधारी,
जिनके सिंगार में गंगा, चाँद,
हज़ारों हैं रूप, हज़ारों हैं नाम।
दशा हो जैसी, काल हो जैसा,
मेरा महाकाल, सबकी सुन लेता,
दशा हो जैसी, काल हो जैसा,
मेरा महाकाल, सबकी सुन लेता,
त्रिनेत्र में जिनके संसार बसता,
देख के बैठे हैं इतिहास युगों का,
भव-सागर से दे पार लगा,
जग के मूल आधार शिवा,
वो मृगछाला, वो भस्मधारी,
जिनके सिंगार में गंगा, चाँद,
हज़ारों हैं रूप, हज़ारों हैं नाम।
देखा जब संकट में सब को,
आए बनकर शक्ति तब वो,
हर लिया हर कष्ट हरि ने,
नष्ट करके पापी जगत को,
त्रिशूलधारी, सत्य मंडल,
वो विनाशी, वो ही मंगल,
शिव ने बनाया सब कुछ,
शिव समाए सबके अंदर,
वो मृगछाला, वो भस्मधारी,
जिनके सिंगार में गंगा, चाँद,
हज़ारों हैं रूप, हज़ारों हैं नाम।
विश्वनाथ मम नाथ पुरारी,
त्रिभुवन, महिमा विदित तुम्हारी,
अंत भी तुम हो, तुम ही अनादि,
अनंत अंश तुम्हरे, त्रिपुरारी,
किरण सुहानी, हर शाम सुहानी,
जिसको हो जाए दरस रुहानी,
जो हो जाए शिव के दीवाने,
उसकी हो जाए दुनिया दीवानी,
उसकी हो जाए दुनिया दीवानी।